: आवाम दुखी तो मैं भी दुखी, जीत के बाद हर समस्या का होगा समाधान
Thu, Apr 25, 2024
जम्मू/राजौरी/ न्यूज उड़ान जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश के अंतर्गत राजौरी, पुंछ अनंतनाग सीट पर चुनाव तीसरे चरण में तारीख 7 मई को होगा।इस सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपना कोई भी उम्मीदवार नहीं उतरा है। इस बीच, इस सीट पर सबसे दिलचस्प मुकाबला पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच माना जा रहा है।इन्ही नामी पार्टियों के नेताओं को टक्कर देने के लिए आजाद उम्मीदवार सुशील कुमार बजरंगी मैदान में उतरे हैं।जिनका चुनाव चिन्ह गैस सिलेंडर है। बजरंगी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता मौजूदा हुक्मरान और खोखले दावे करने बालों से तंग है। उनकी समस्या कोई सुनने बाला नहीं है। जो उनकी समस्या सुने और तुरंत समाधान करे। राजौरी पुंछ की आवाम दुखी तो में दुखी। जीत के बाद हर समस्या का हल तुरंत होगा। राजौरी-पुंछ क्षेत्र मेरा अपना घर है और जीत गया तो अनंतनाग क्षेत्र सुसराल होगा। वहीं लोगों का कहना है कि आतंकवादियों के खौफ के चलते भाजपा ने अपना उम्मीदवार नहीं उतरा है।राजौरी, पुंछ और अनंतनाग लोकसभा क्षेत्र के मैदान में आजाद उम्मीदवार की लड़ाई में कूदने वाले सुशील कुमार बजरंगी की नई पहचान सामने आई है।गांव से लेकर शहर और सीमावर्ती क्षेत्र में ढोल नगाड़े से उनका स्वागत किया जा रहा है।2019 कोरोना काल से लेकर अब तक की लड़ाई में बजरंगी गरीब, बेसहारा , बेरोजगार युवाओं की समस्या को उजागर कर उनकी समस्याओ का समाधान करवाने के लिए दिन-रात लोगों के बीच अपनी सेवा दे रहे हैं।और अब वह लोकसभा चुनाव के लिए एमपी कुर्सी के लिए आजाद तौर पर मैदान में उतरे हैं।
सुशील बजरंगी ने कहा कि जिन लोगों के साथ अन्याय हो रहा है।उन्हें न्याय मिलेगा। मैं झूठे वादे करने वालों में से नहीं हूं। में ईश्वर और अपने द्वारा किए काम पर भरोसा रखता हूं।राजौरी, पुंछ अनंतनाग की आवाम मेरे पर भरोसा करे। विकास के नाम पर क्षेत्र व आवाम को लूटने वाले भ्रष्ट नेताओं, अधिकारियों पर कार्रवाई करवाई जाएंगी। संसदीय उम्मीदवार (मिंबर आफ मार्लिमेंट) के प्रत्याशी ने कहा कि सुशील बजरंगी भारत का एक जिम्मेदार नागरिक है, जो अपने देश से बहुत प्यार करता है और देश की समस्याओं से चिंतित है।जो हर गरीब, मजदूर, किसान, नौजवान और बहन-बेटियों के सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है।
आप मेरा साथ दें।राजौरी पुंछ मेरा घर है और जीत गया तो अनंतनाग क्षेत्र सुसराल होगा।मेरा चुनाव चिन्ह गैस सिलेंडर है लोगों से अपील है कि वह आने बाली 7 मई को गैस सिलेंडर का बटन दबाकर वोट करें।बता दें कि जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश के अंतर्गत राजौरी, पुंछ अनंतनाग सीट पर चुनाव तीसरे चरण में तारीख 7 मई को होगा।इस सीट के लिए ( भारतीय जनता पार्टी ( बीजेपी) ने अपना कोई भी उम्मीदवार नहीं उतरा है। क्योंकि इन इलाकों में आतक का कहर है।दरअसल, 18 लाख से अधिक मतदाताओं वाली अनंतनाग , पुंछ राजौरी सीट पर 7 मई को मतदान होना है और यह निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन के बाद दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग से लेकर पीर पंजाल के पुंछ तक फैला हुआ है।अनंतनाग, कुलगाम, पुंछ और राजौरी में 18 विधानसभा क्षेत्र 200 किलोमीटर से अधिक की दूरी के साथ एक खतरनाक मुगल रोड और जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग से जुड़े हुए हैं।उम्मीदवारों को उस निर्वाचन क्षेत्र में प्रचार करना और प्रचार करना कठिन है, जो विशाल पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला से अलग है, जहां सुरक्षा चुनौतियां भी हैं, क्योंकि पीर पंजाल क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में आतंकवादियों द्वारा सुरक्षा बलों पर बड़े हमले हुए हैं, जिनमें कई लोग मारे गए हैं।राजौरी और पुंछ में सेना के 20 जवान भी मारे जा चुके हैं। माना जा रहा है कि भाजपा ने हार के साथ ही आतंक के खौफ के नजरिए से उम्मीदवार को नहीं उतरा है,और एनसी से मिया अल्ताफ अहमद और पीडीपी से पीडीपी चीफ पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को टक्कर देने के लिए सुशील कुमार बजरंगी मैदान में उतरे हैं।
: सरकारी स्कूल का हेडमास्टर निकला आतंकियों का मददगार , गोला बारूद बरामद
Sun, Apr 21, 2024
जम्मू/राजौरी /न्यूज उड़ान जम्मू-कश्मीर के जिला पुंछ के अंतर्गत एक सरकारी स्कूल का हेड मास्टर पिछले कईं सालों से आतंकवादियों की मदद कर रहा था और आतंक को फैलाने के लिए तरह-तरह के हथ कंडे अपना रहा था। सूत्रों के मुताबिक ओजीडब्ल्यू पिछले लंबे समय से आतंक फैलाने का काम तो कर ही रहा था , उसका मकसद आगामी चुनाव की भीड़ में बारी नुकसान पहुंचाने का था। सेना की आर-आर बटालियन , रोमियो व जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप बिंग के जवान काफी दिनों से उसका पीछा कर रहे थे।आखिर ओजीडब्ल्यू हेडमास्टर को जवानों ने दरदबोच लिया। पूछताछ के उपरांत उसके कब्जे से विदेशी हथियार व गोला बारूद बरामद किया गया, जांच जारी है।पुलिस ने रविवार को एक हेडमास्टर को गिरफ्तार किया है, जो ओजीडब्ल्यू के तौर पर आतंकियों के लिए कार्य कर रहा था। उसके पास से पिस्तौल और ग्रेनेड भी बरामद हुआ है। जानकारी के मुताबिक पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र में रविवार को सेना की राष्ट्रीय राइफल और रोमियो व जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप बिंग के जवानों ने एक संयुक्त अभियान चलाया। इस दौरान एक ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) को पिस्तौल और ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार किया गया है।ओजीडब्ल्यू एक सरकारी स्कूल में हेडमास्टर के तौर पर कार्यरत है। उसके पास से एक पिस्तौल और घर से दो विदेशी ग्रेनेड भी बरामद किए। पकड़े गए ओजीडब्ल्यू की पहचान क़मरुद्दीन के रूप में की गई है। इस संबध में मामला दर्ज कर जांच कार्रवाई शुरू है।
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रिपोर्ट -अनिल भारद्वाज
: 15 अगस्त 1947 को नहीं 13 अप्रैल 1948 को आज के दिन आजाद हुआ था राजौरी
Sat, Apr 13, 2024
जम्मू/राजौरी/ न्यूज उड़ान/
आखिरकार स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी रंग लाई। पूरे देश में आजादी का जश्न मनाया जा रहा था,जो हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान को रास नहीं आया।उसने कबाइलियों को भेजकर राज्य पर कब्जा करने का असफल प्रयास किया। सेना ने कबाइलियों को घाटी से खदेड़ा तो वे राजौरी में घुस आए और तीस हजार से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया।12 अप्रैल 1948 की आधी रात तक राजौरी पर कहर टूटता रहा लेकिन 13 अप्रैल 1948 का सूरज खुशियां लेकर आया।इस दिन भारतीय सेना ने राजौरी को लेकर कबाइलियों से मुक्त करा अपने कब्जे में ले लिया।इसलिए राजौरी के लोग 13 अप्रैल को विजय दिवस के रूप में मनाते हैं।
26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर राज्य का विलय भारत के साथ कर दिया।इसके ठीक एक दिन बाद 27 अक्टूबर 1947 को पाक ने कबाइलियों को जम्मू-कश्मीर में भेजकर कब्जा करने का प्रयास किया।कबाइलियों ( पाकिस्तानी दहशतगर्द) ने राजौरी में आते ही लोगों को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया।महिलाओं की अस्मत लूटी गई। 11 नवंबर 1947 को देश में दीपावली का पर्व मनाया जा रहा था उस समय राजौरी कबाइलियों की जुल्म में जल रहा था।पूरा राजौरी आग की लपटों में घिरा हुआ नजर आ रहा था, इस दौरान तीस हजार से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।बड़ी संख्या में महिलाओं ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली, कई महिलाओं ने अपनी बेटियों के साथ जहर खा लिया तो कुछ ने कुएं में छलांग लगा बलिदान दे दिया, राजौरी सिटी के बीच तहसील कार्यालय के पास बलिदान भवन मौजूद है।जिसका निर्माण 1969 में करवाया गया और इसी वर्ष बलिदान भवन और तहसीलदार कार्यालय के पास शहीदों की याद में बीते वर्ष बलिदान स्तंभ बनाया गया,और मालमंडी ( गुज्जर मंडी) चौक में शहीदी स्मारक है।जहां हर वर्ष 13 अप्रैल को शहीदों को सेना, पुलिस प्रशासन व लोगों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। राणे हवाई पट्टी ( सैन्य मैदान) राजौरी में सेना द्वारा मेले का आयोजन भी किया जाता है ,और इतिहास के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है।
.....बीते दो वर्ष की दास्तां _ भयानक मंजर याद कर कांप जाते हैंभाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री कुलदीप राज गुप्ता निवासी राजौरी जिनका दो वर्ष पहले ही बुजुर्गी हालत में देहांत होगा था उन्होंने अपने 2022 को हम से बात करते हुए बताया था की आज भी भयानक मंजर को याद कर कांप उठते है।बच्चों के रोने की आवाज आज भी सुनाई देती है, मां से बच्चे जुदा हो रहे थे उस समय राजौरी के तहसीलदार हजारी लाल थे।हमले के समय लोगों की सुरक्षा के लिए गोरखा राइफल के बीस जवान तैनात थे, पर हमारे तहसीलदार जवानों को अपने साथ लेकर रियासी भाग गए थे।उस समय आरएसएस, महार व सिंह सभा के लोगों ने दुश्मन का डट का मुकाबला किया। बीते तीन वर्ष 10 जून को 90 साल की उम्र में दुनियां को अलविदा कहने से पहले जब आजादी के विषय पर पूर्व एमएलसी चौधरी गुलजार जी से हमारी बात हुई तो उनका कहना था कि कबाइलियों ने राजौरी पर बहुत कहर बरपाया।जो भी सुंदर महिला मिली उसको अपने साथ ले गए, किसी को भी नहीं छोड़ा जो मिला उसे मौत के घाट उतार दिया, उनका कहना था कि जब वह मंजर याद आता है तो आंखों से आंसू अपने आप बहने लगते हैं। वहीं कुछ वर्ष पहले जिंदगी को अलविदा कह चुके निवासी जवाहर नगर रामपुरा राजौरी (जम्मू) बेली राम ने बताते हुए कहा था मेरे को पाकिस्तानी कबाइलियों ( दहशतगर्द) ने लाइन से बाहर कर जबरन ढोल बजाने को कह था पुराने जिला अस्पताल की इमारत की जगह में सभी लोगों को रात भर प्यासे रखा गया और अगले रोज हथियार की नोक पर पास के ग्राउंड में ले गए और कत्ल कर दिया।बूढ़े , बुजुर्ग बच्चों को सामने बाले ग्राउंड जिसे एएलजी सेना मैदान कहा जाता है उसपर लाइनों में खड़ाकर लहूलुहान कर रहे थे हर तरफ चीख पुकार ही सुनाई दे रही थी ,रूह कांप रहा था। अपनों का दर्द देखा नहीं जा रहा था, आंसू बह रहे थे, पर में बेबस था।वहीं 2010 को हमारी बात राजौरी छत्तीगली निवासी बिमला जी से हुई थी जो आजादी की गवाह आज हमारे बीच नहीं है उन्होंने कहा कबालियों की चुगल से बच्ची को छुड़वा रही थी उस समय दुश्मनों ने तलवार से मेरे पर वार कर दिया मेरे चेहरे पर उनका दिया निशान है। हर तरफ लुटपाट जारी थी कईं दिनों तक हजारों लोगों को प्यासे रखा और दुख दर्द से बरी दास्तां को सुनते हुए रो पड़ी।
...मंडी चौराहे व एएलजी सेना मैदान पर विशेष कार्यक्रमप्रत्येक वर्ष 13 अप्रैल को जिला सचिवालय से चंद ही दूरी पर मंडी चौराहे पर बनाए गए शहीदी स्मारक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।इसमें सैन्य अधिकारी, धर्म गुरु, प्रशासनिक अधिकारी व आम लोग प्रार्थना सभा में भाग लेते हैं।
शाम तक शहीदी स्मारक को सजने सबरने का काम सेना जवानों द्वारा किया जा रहा था।
........मौलवी गुलाम उल दीन भी किए जाते हैं यादमौलवी गुलाम उल दीन ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाक सेना की हर गतिविधि की सूचना भारतीय सेना को दी और सेना के जवानों ने समय रहते अपनी सभी तैयारियों को पूरा करके दुश्मन का डट कर मुकाबला किया।उस दौरान सेना ने मौलवी को पद्म श्री से सम्मानित किया था। प्रत्येक वर्ष राजौरी दिवस के दिन मौलवी गुलाम उल दीन को भी याद किया जाता है और उनके द्वारा किए गए इस कार्य को लोगों को बताया जाता है।
........महिलाओं ने इस कुएं में लगाई थी छलांगजिस जगह पर बलिदान भवन का निर्माण किया गया है वहां पर एक कुआं हुआ करता था। कबायलियों के हमले से बचने के लिए कई महिलाओं ने इस कुएं में छलांग लगाकर अपने प्राणों की आहुति दी थी।उसके बाद यहां पर बलिदान भवन का निर्माण करवाया गया। विजय दिवस के अवसर पर यहां श्रद्धांजलि समारोह में शहीदों को याद कर उनकी आत्मा की शांति की दुआ मांगी जाती है।माली बी को दी जाएगी श्रद्धांजलिजांबाज महिला माली बी ने 1971 के युद्ध से पहले ही सेना के अधिकारियों को इस बात की जानकारी दे दी थी कि पाक सेना किसी भी समय आक्रमण कर सकती है।जिसके बाद सेना के जवानों ने सीमा पर सुरक्षा को पुख्ता किया और दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। इसके बाद माली बी को पद्म श्री से सम्मानित किया गया।प्रत्येक वर्ष 13 अप्रैल के दिन माली बी को श्रद्धांजलि दी जाती है।
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