: कश्मीर के पहाड़ों से मवेशियों संग मैदानों की और लौटने लगे गुज्जर बक्करवाल
Sun, Nov 5, 2023
जम्मू/मौसम के मिजाज बदलते ही उच्च पहाड़ी ठंडे इलाकों से सफर करते हुए गुज्जर बक्करवाल (खाना बदोश) समुदाय के लोग मैदानी क्षेत्रों में पहुंचने लगे हैं। सितंबर माह के शुरू से ही इन लोगों ने उच्च पहाड़ी क्षेत्रों कश्मीर पीर पंजाल से मैदानी क्षेत्रों की ओर रुख कर लिया था। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के कश्मीर के कुछ हिस्सों व पीर पंजाल पहाडों पर पिछले माह हुई ताजा बर्फबारी होने से और साथ ही बारिश से सर्दी ने पैर पसारना शुरू कर दिए थे, ऐतिहासिक मुगल रोड भी बारिश से भूस्खलन व बर्फबारी होने से दोनों तरफा बंद हो गया था। लेकिन अब मौसम साफ है। और छह माह के लिए भेड़ बकरियों के साथ पहाडों पर गए बक्करबाल समुदाय के लोग जिला राजौरी और जिला पुंछ के निचले मैदानी इलाकों की और रुख कर रहे हैं। दिन को जंगलों में समय बिताते हुए रात को साफ रास्ते और सड़क मार्ग से आगे बढ़ते हुए देखे जा सकते हैं। जिससे सड़कों पर जाम की समस्या भी देखी जा सकती है। बुजुर्ग व बच्चे लोग घोड़ों पर सबार होकर आगे बढ़ते हैं। मवेशियों व खुद को जंगली जानवरों के नुकसान के बचाने के लिए उनके साथ पालतू कुत्ते होते हैं।
मौसम की सर्दी शुरू होते ही करीब 40 दिन का सफर करते हुए यह लोग मैदानी क्षेत्रों में पहुंचते हैं और मार्च से पहाड़ी क्षेत्रों की ओर रुख करने लगते हैं। अपने मवेशियों के साथ सदा सफर में रहने वाले इस समुदाय के सभी सदस्य और उनके रिश्तेदार एक साथ पहाड़ों की ओर जाते हैं। वहां जगह-जगह चारे के हिसाब से पड़ाव डालते हुए मौसम के बदलते मिजाज के हिसाब से डेरे बदलते रहते हैं।-सदियों से गुज्जर बकरवाल समुदाय भेड़, बकरियों, भैंसों को लेकर इसी तरह जीवन बसर करते आ रहे हैंबकरबाल समुदाय के सदस्य मोहम्मद सदाम, रिशाद ने बताया कि सदियों से उनका समुदाय भेड़ बकरियों, घोड़ों को लेकर गर्मियों में पहाड़ों की ओर चला जाता है। सर्दी में मवेशियों के साथ मैदानी क्षेत्रों में आ जाते हैं। अक्सर उनके डेरे हर वर्ष एक ही स्थान पर रहते हैं। काफी संघर्ष भरा जीवन है, लेकिन उनका यह पारंपरिक काम है जिसे वह छोड़ना नहीं चाहते। इस दौरान प्रशासन का पूरा सहयोग रहता है। बकायदा गुज्जर बक्करबाल लोगों के परमिट होते हैं। अब तो मवेशियों को एक साथ से दूसरे स्थान में ले आ जाने में सरकार गाड़ियां भी देती है। पहाडों में जब हम लोग होते हैं बच्चों को मोबाइल टीचर्स बढ़ाते हैं जिन्हें सरकार वेतन देती। व भारतीय सेना द्वारा भी उनकी मदद की जाती है।
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अनिल भारद्वाज
: भगवान सबमें हैं, लेकिन सबसे अलग भी हैं: विश्वात्मानंदजी
Fri, Nov 3, 2023
जम्मू एवं कश्मीर/राजौरी-
एसवीएस ज्ञान गंगा आश्रम में एक सप्ताह तक चलने वाले "श्रीमद्भागवत तत्व ज्ञान यज्ञ" (भागवत कथा) का समापन पूरे उत्साह, धार्मिक उत्साह और उल्लास के साथ हुआ। आठ दिनों के कार्यक्रम के दौरान आसपास के क्षेत्रों से करोड़ों भक्त भगवान कृष्ण के दिव्य कृत्यों और उनके दिव्य कृत्यों के पीछे के सच्चे अर्थ को सुनने के लिए एकत्र हुए। कार्यक्रम पिछले महीने की 25 तारीख को शुरू हुआ था और 1 नवंबर को परम पावन की देखरेख में संपन्न हुआ। अटल पीठाधीश्वर राजगुरु आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 श्री स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज।
स्वामीजी ने कथा की शुरुआत यह कहकर की कि भागवत कथा सुनने से व्यक्ति अपने जीवन के तरीके को काफी हद तक बदल सकता है। स्वामीजी ने आगे कहा कि हमारी अभिव्यक्तियां केवल असत्य को जन्म देती हैं और अंततः दुनिया को असत्य बनाती हैं। कथा को आगे बढ़ाते हुए स्वामीजी ने कहा वह ईश्वर सबमें है, लेकिन वह सबसे अलग भी है, वह हर पल हमारे साथ है। पूरे समारोह के दौरान कथा के मुख्य वक्ता स्वामीजी ने भगवान कृष्ण के जीवन इतिहास के हर पहलू की व्याख्या की। विभिन्न पात्रों की जिन्होंने तदनुसार वामन, सुदामा, कंस, रासलीला जैसी विभिन्न भूमिकाएँ निभाईं।
राजा परीक्षित को श्राप का वर्णन, गुरु सुखदेवजी का आगमन, ब्रह्माजी की उत्पत्ति का वर्णन, भगवान की लीलाओं का वर्णन और सुखदेवजी द्वारा राजा परीक्षित को श्राप से मुक्त कराने के उपाय का वर्णन, श्रीकृष्ण की लीलाएं और अंतःकरण की शुद्धि सहित अनेक प्रसंग माता यशोदा और वासुदेवजी को कृष्ण के स्वरूप के दर्शन कराना और पूतना, कंस के वध का वर्णन किया गया। गोपियों का अभिमान और भगवान का ध्यान और गोपियों के हृदय में पुनः कृष्ण भाव उत्पन्न होना और महारासलीला जैसे प्रसंगों का वर्णन सप्ताह भर चली कथा के दौरान श्री स्वामी जी द्वारा सुदामा जी महाराज, राजा परीक्षित को श्राप से मुक्ति, श्री कृष्ण द्वारा गोपियों को संदेश का भी वर्णन किया गया। समापन दिवस पर परिसर में लंगर का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। प्रसाद लिया और स्वामीजी के प्रति अपनी पूर्ण श्रद्धा अर्पित की।
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अनिल भारद्वाज
: श्री आरआर स्वैन ने जम्मू-कश्मीर के 17वें डीजीपी के रूप में पदभार संभाला
Wed, Nov 1, 2023
जम्मू-कश्मीर/श्रीनगर- श्री आरआर स्वैन ने आज दोपहर पीएचक्यू श्रीनगर में आयोजित एक समारोह में जम्मू-कश्मीर के 17वें पुलिस महानिदेशक के रूप में पदभार संभाला।
विशेष महानिदेशक अपराध जम्मू-कश्मीर, श्री एके चौधरी, एडीजीएसपी, श्री एसजेएम गिलानी, श्री एमके सिन्हा, श्री विजय कुमार, निदेशक, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं, जम्मू-कश्मीर, श्री आलोक कुमार, आयुक्त सचिव उद्योग और वाणिज्य श्री विक्रमजीत सिंह, आईजीपी श्री वी. के. बिरदी, आईजीपी (सीआईवी/मुख्यालय) श्री बीएस टूटी और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
श्री आरआर स्वैन के आगमन पर वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और पीएचक्यू लॉन में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने गार्ड ऑफ ऑनर का भी निरीक्षण किया.
1991 बैच के आईपीएस अधिकारी श्री आरआर स्वैन, जम्मू-कश्मीर के डीजीपी का पदभार संभालने से पहले जम्मू और पुलिस के विभिन्न महत्वपूर्ण और प्रमुख पदों पर तैनात रहे, जिनमें शामिल थे-एसडीपीओ कोठी बाग, एसपी रामबन, एसपी कारगिल, एसपी पुंछ, एसएसपी कठुआ, एसएसपी जम्मू, एसएसपी श्रीनगर, एआईजी (पी/डब्ल्यू) पीएचक्यू और डीआइजी सतर्कता। नवंबर 2006 में श्री स्वैन भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर चले गए जहाँ उन्होंने बहुत प्रतिष्ठित पदों पर कार्य किया। जून 2020 में, श्री स्वैन सीआईडी विंग के प्रमुख के रूप में जम्मू-कश्मीर पुलिस में शामिल हुए और आज उन्होंने डीजीपी जम्मू-कश्मीर का कार्यभार संभाला।
जम्मू-कश्मीर के डीजीपी का कार्यभार संभालने के तुरंत बाद श्री आरआर स्वैन ने पीएचक्यू में एक बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पीएचक्यू और अन्य विंग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
विभिन्न विंगों के एचओडी और पीएचक्यू के वरिष्ठ अधिकारियों ने डीजीपी को अपने विंग और कार्यालयों के कामकाज/कार्यप्रणाली आदि के बारे में जानकारी दी।
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अनिल भारद्वाज