: जम्मू-कश्मीर: उधमपुर में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, एक जवान शहीद
Thu, Apr 24, 2025
जम्मू( न्यूज उड़ान) जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से सुरक्षाबल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. उधमपुर के डुडु-बसंतगढ़ में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ चल रही है। इस आतंकी मुठभेड़ में सेना का एक जवान के शहीद हुआ है। इससे पहले सेना ने बारामूला में 2 आतंकवादियों को मार गिराया, जिनके पास से हथियार और आईईडी बरामद हुए। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से ही सेना और पुलिस की तरफ से लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। सेना की कई टुकड़ी पूरे इलाके में गहन सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। जम्मू प्रदेश के उधमपुर सर्च ऑपरेशन के दौरान सेना पर आतंकियों ने गोलियां चला दीं, जिसके जवाब में सेना की तरफ से भी लगातार फायरिंग हो रही है। ऐसा माना जा रहा है कि यहां सेना ने दो से तीन आतंकियों को घेर लिया है। सूत्रों के अनुसार आतंकवादियों का वही समूह है जिसे हाल ही में रामनगर क्षेत्र में ट्रैक किया गया था। ये 3 पाकिस्तानी आतंकी हो सकते हैं। इस मुठभेड़ में रूक-रूक कर दोनों तरफ से गोलियों की आवाज आ रही है। घटनास्थल पर भारी जेकेपी सहित अन्य फोर्स मौजूद है। पहलगाम हमले के बाद से ही भारतीय सेना अलर्ट मोड पर काम कर रही है। सूत्रों की माने तो इस समय घाटी में 100 से ज्यादा आतंकी एक्टिव हैं। वहीं जम्मू, राजौरी और पुंछ जिला में 60 से ज्यादा आतंकी सक्रिय है। वहीं आतंक को लेकर स्थानीय प्रदेश के लोगों में केंद्र सरकार के प्रति काफी रोष है। जो 370 धारा हटाने के बाद भी आतंक को जम्मू कश्मीर से खत्म नहीं कर पाई, बल्कि नुकसान ही नुकसान हो रहे है। लोगों ने कहा कि केंद्र सरकार वोट की राजनीति बंद कर आतंकियों पर कार्रवाई करे। रिपोर्ट.....अनिल भारद्वाज
: कंट्रीली तारों में जकड़ा हुआ दिखा राजौरी दिवस का मेला, लाखों का खर्चा ।
Mon, Apr 14, 2025
जम्मू/राजौरी/ न्यूज उड़ानजम्मू का राजौरी क्षेत्र 15 अगस्त 1947 को नहीं, 13 अप्रैल 1948 के दिन आजाद हुआ था आजादी दिवस पर प्रशासन, सेना द्वारा लाखों रु. खर्च कर हर साल मेले का आयोजन किया जाता है, पर उस मेले का क्या फायदा जो आम लोगों को देखना नसीब न हो और पाबंदियां लगा दी जाएं। आम लोगों के लिए पाबंदियां क्यों न हों ,एलजी ने जो मेले में आना था। प्रशासन को आवाम से क्या लेना देना पाबंदियां से यही दर्शाता । केंद्र सरकार लाख दावे करे, लेकिन सच्चाई तो यह है कि जम्मू कश्मीर में आज भी अशांति है। लोगों को लगा था कि धारा तीन सात जीरो हटने के बाद परेशानियों में सुधार होगा , लेकिन नहीं आज भी केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की आवाम आज भी कंट्रीली तारों के झाल में फंसी देखी जा सकती है, चाहे नियंत्रण सीमा-रेखा के पास बसने वाले किसान लोग हों या जिला हैडक्वाटर की सीटी के शहरी लोग, यूटी प्रशासन के बड़े अवसर के आने पर सिटी के रास्ते कुछ कि.मी सड़क मार्ग पर कंट्रीली तारें बिछा कर क्षेत्र को सीज कर दिया जाता है।यही हाल राजौरी स्वतंत्रता दिवस (राजौरी-डे) पर रविवार राजौरी सिटी में भी देखा गया।लोगों के रोजमर्रा रास्ते , सड़कें कंट्रीली तारें साथ सुरक्षाबलों को तैनात कर बंद कर दिए। जिसके चलते जीएमसी अस्पताल इलाज को आने -जाने वाले मरीज, बुजुर्ग, बच्चे, बीमार महिलाओं , अन्य राहगीर लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।राजौरी के आजादी दिवस पर केंद्र सरकार के सुरक्षा संबंधित सभी दावे खोखले हैं । राहगीर लोगों का कहना था कि जम्मू कश्मीर में शांति होती तो आज सड़कें बंद न होती, कंट्रीली तारें बिछी न होती। हम अपनी मर्जी से स्वतंत्रता के साथ चल-फिर रहे होते, आज कंट्रीली तारों में जकड़े न होते। हमें यह नहीं पता के राजौरी में क्या हो रहा है।
जम्मू-कश्मीर में नेता व बड़े अवसरों को छोड़ सभी असुरक्षित हैं। आजादी दिवस के रोज क्षेत्र वासियों को स्वतंत्रता से चलने-फिरने , सेहती दायरा यानी अस्पताल के लिए इलाज को जाने वाले रास्ते, सड़क मार्ग अगर पाबंदी लगा दी जाए तो राजौरी दिवस का क्या फायदा। 13 अप्रैल 1948 की सुबह भारत देश के राजौरी वासियों के लिए आजादी का दिन था जो हर वर्ष मनाया जाता है।शहीद लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। राजौरी के लोग इसे विजय दिवस और सेना शौर्य दिवस के रूप में मनाती है।
बड़े लेवल पर मेले का आयोजन किया जाता है। जो आम लोगों की पहुंच से बाहर था। कुछ सलेक्टेड संस्थाओं के सदस्यों, लोगों, निजी स्कूल, नेताओं व अन्य गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया जाता है। यह भी बताते चले कि आमंत्रित पत्र में सेना का हाथ नहीं होता, बल्कि ऊपर से आदेश का पालन करना जरूरी होता है। हमने तो कंट्रीली तारों के अंदर सेना के जांबाज जवान देखे हैं।जगह का नाम हम बता नहीं सकते। यह तो आम जनता है जम्मू-कश्मीर की इसे परेशानियां न झेलनी पड़े ये हो नहीं सकता है। रविवार मेला समापन के दौरान छोटे वाहन चालक भी परेशान दिखे जिसमें तीन पहिया ऑटो शामिल हैं।सेना द्वारा आयोजित मेले में जम्मू कश्मीर प्रदेश के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सेना अधिकारियों का कहना था कि बाहरी सुरक्षा का जिम्मा एलजी सिक्योरिटी और जेकेपी के हाथ था। हम चाहते हैं मेले में हर कोई आए। वहीं बताते चले की वीर सैनिकों और वीर जवानों की वीरता और शौर्य को याद करने के लिए ( एएलजी) एडवांस लैंडिंग ग्राउंड राजौरी में मुख्य मेला समारोह का आयोजन किया गया।भारतीय सेना जवानों का कर्तव्य देखने लायक था। आजादी के अवसर पर आयोजित मेला दांतों तले उंगली चबाने पर मजबूर कर रहा था। पर उस मेले का क्या फायदा जिसे गरीब आवाम न देख सके।
...रिपोर्ट....अनिल भारद्वाज
: JCO Killed As Army Foils Infiltration Bid On Loc In J&K
Sat, Apr 12, 2025
J&K/JAMMU/NEWS UDAAN .A Junior Commissioned Officer (JCO) of the Indian Army was killed when alert soldiers foiled an infiltration bid on the Line of Control (LoC) in Jammu and Kashmir’s (J&K’s) Akhnoor sector, officials said on Saturday. Officials said that late on Friday evening, terrorists tried to infiltrate into the Indian side of the LoC in Keri-Battal area of Akhnoor sector in Jammu district. “Alert Army soldiers engaged the terrorists in exchange of gunfire and the infiltration bid was foiled. “In the exchange of fire with the terrorists, one JCO was critically injured. He was shifted to hospital yesterday. He succumbed to critical injuries today”, officials said. Kuldeep Chand was a soldier with the 9 Punjab regiment, the Army’s Jammu-based White Knight Corps said in a post on X. Paying tributes to the fallen soldier the Army posted on platform X, GOC White Knight Corps and all ranks salute the supreme sacrifice of Braveheart Sub Kuldeep Chand of 9 PUNJAB. He laid down his life while gallantly leading a Counter Infiltration operation along the Line of Control in the Keri-Battal area of Sunderbani on the night of 11 April 2025. His team’s valour and Sub Kuldeep’s ultimate sacrifice foiled an infiltration attempt by terrorists. We stand in solidarity with the bereaved family in this hour of grief.
Earlier in another operation, three terrorists were killed by joint forces in the three-day-long operation in Chatroo forest area of Kishtwar district. A top commander of Jaish-e-Mohammad (JeM) outfit, Saifullah was among the slain terrorists.
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Report .....Anil Bhardwaj